A short letter to my dearest Father

पुनर जन्म अगर होता है तो पिछले जन्म में ज़रूर कोई अच्छे कर्म किये होंगे मैंने जो इस जन्म में आप मेरे पिता हैं।


मेरे उम्र के बहुतों को मैंने अपने पिता के बारे में गलत कहते सुना है।

वो कहते हैं के काश मेरे पिता मुझे समझ पाते, काश वो अच्छे पिता होते।

मैं उम्मीद करता हूँ के ऐसे बेटे आगे चल के अच्छे पिता बने।


मुझे ये कभी समझ नहीं आया के जो खुद को नहीं समझ पाते वो कैसे उम्मीद करते हैं के कोई दूसरा उन्हें समझे?

      अगर उनके पिता उन्हें समझने में लग जाये या अपनी पत्नी को हमेशा यात्रा कराने और उनके साथ सबकी शादी और जन्म दिन या कोई पार्टीज में जाने लगे 

      तो फिर उन बच्चों की स्कूल और कॉलेज की फीस कौन देगा?

उन्हें पॉकेट मनी कौन देगा?

मोबाइल फ़ोन और बाइक कौन देगा।


मेरा ये मानना है के ज़्यादातर लोग जो कामयाब होतो है उनका परिवार उन्हें गलत समझता है और कुछ रिश्तेदार तो जलते हैं क्यों के जो उन्होंने हासिल किया येलोग नही कर पाए।                           

दुनिया सच मे बड़ी अजीब हैं ना?


जो भी अपने पिता को गलत समझता है पहले वो खुद कितना सही है ये देख लें।

अगर खुद में गलती नहीं दिखी तब तो वो बहुत ही अच्छे बेटे हैं और उनके पिता खराब।


मेरे पिता से अनजाने में अगर गलती हो भी गई तो क्या 

मुझसे भी तो होती हैं अनजाने में गलतीया।

    सबके पिता अपने बच्चे को समझने में और परिवार के साथ समय बिताने में लग जाये तो वो परिवार उनसे और नफरत करने लगेगा के आपके पास जब पैसे नही तो शादी क्यों कि, बच्चे भी ये ही बोलेंगे के रमेश और सलीम के पास Iphone है अगर आप उनके पिता की तरह होते तो मेरे पास भी iphone 11 होता।


कुछ पिता तो इतना परेशान हो जाते हैं अपने परिवार से के  व्यपार पैसे कमाने से ज़्यादा परिवार से पीछा छुड़ाने के लिए करते हैं, अपनो में अकेले हैं वो 

उनके व्यपार ने ही उन्हें अपनाया हैं और व्यपार ही उनका अकेलापन दूर करता है।


मेरे पिता भी मुझे समझ नहीं पाते पर क्या मैं उन्हें समझता हूँ या मुझे बस लगता है के मैं उन्हें समझता हूँ?

 उन्होंने कभी कोई कमी महसूस होने नही दी और ना ही कभी मेरी सोच को बांधने की कोशिश की।

 पर क्या अगर मुझे कुछ कमी महसूस हो तो इसके लिए अपने पिता को दोशी ठहराना सही होगा?

   मेरे पिता जैसे रहते हैं और जैसे जीते हैं बिल्कुल वैसे ही मुझे पसंद हैं ।

इनका व्यपार इनकी मंदिर और मस्जिद है

काम इनकी पूजा और नमाज़ है

और कमाई इनका प्रसाद है

जब मैं इनको काम में बिजी देखता हूँ तो मुझे ये ज़िन्दा दिखाई देते हैं। 

कभी कभी मैं सोचता हूँ के अगर इनके जैसी शिद्दत और जज़्बा मुझमे भी होती तो अच्छा होता ये अपने काम को enjoy करते हैं शायद इनका काम ही इनका pubg है और मुझे ना pubg समझ आता है ना ही कोई काम 😆


मैं बिल्कुल नहीं चाहता के मेरे पिता रमेश या सलीम के पिता जैसे हो वो जैसे हैं या जैसे भी रहना चाहे वो रहे

मुझे वो बहुत बहुत बहुत ही पसंद हैं।

कभी कभी हमारी बहस भी होती है, लोग तो कहते है बाप से बहस करना गलत बात है होगा ये गलत मुझे फ़र्क़ नही पड़ता 

जब बहस में मैं इनसे जीतता हूँ तो मुझे बहुत अच्छा लगता है मगर बाद में बुरा महसूस होता है और इसी तरह हमारी दोस्ती और प्यार बढ़ता है। 

मेरे पिता सबसे अच्छे हैं ये तो नहीं कहूंगा वरना दूसरों के पिताओं को मेरे पिता से जलन होने लगेगी।  😛😛😛

मैं कोई राजा तो नहीं मगर मेरे पिता की वजह से राजा की तरह जीता हूँ।

ज़रूर ये मेरे पिछले जन्म का फल है के मैं मोहम्मद शमीम उद्दीन का बेटा हूँ।


अगर आप वैसे बन जाओ जैसा मैं चाहता हूँ या मैं वैसा जैसा आप चाहते हो तब तो समझो दुनिया गई तेल लेने, हम बेहतर हैं जैसे प्रकिरती ने हमे बनाया है।

    मेरे पिता जैसे हैं बहुत अच्छे है प्रकिरती ने उन्हें यूँही नहीं बनाया है और अगर वो ना होते और मैं रमेश या सलीम का बेटा होता तो शायद जो लिखा है मैने वो लिख ना पाता।



Thank You For Being My Father

From Your 2nd son Kashaf.

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