पैसा और आज का परिवार
एक के पास पैसा तो दूसरे के साथ परिवार है
दोनों फिर भी बेकार हैं ।
जिनके पास ये दोनों है वैसे लोग बस 2, 4 हैं
संसार तो कुछ ऐसा है इज़्ज़त देता बस उसको जिसके पास है पैसा
पैसा बना कर समाज मे इज़्ज़त पा कर क्या फायदा
वो तुम्हारी नहीं तूम्हारे पैसे की इज़्ज़त करते हैं ।
लोग तुम्हारे नाम के बाद तूम्हारा पेशा पूछते है वो इस लिए क्यों के तूम्हारा पेशा ही उन्हें ये बताएगा के तुम्हारी इज़्ज़त कितनी करें ।
फिर भी समाज में अगर इज़्ज़त चाहिए तो ऐसे काम करो जो अवैध हैं बहुत इज़्ज़त मिलेगी ।
दूसरी तरफ है परिवार जो ये चाहता है के तुम उनके नीचे रहो और वो जो कहें वो करो ऊपर से वो तुम्हें ताना भी देंगे जब तुम कुछ नही करोगे और जब तुम कुछ करना चाहोगे तो तुम्हे रोकेंगे
कामयाब तो तुम काफी पहले हो चुके होते मगर इन्होंने तो तुम्हारे पंख ही काट दिए है ।
तुम्हारे दुश्मन तो वो ही हैं जो ये दावा करते हैं के वो तुमसे प्यार करते हैं अरे प्यार वेयार कुछ नहीं सब बस देखावा करते हैं ।
रिश्तेदार तुम्हारे अगर तुम्हारी बुराई करे तो तुम भी उनके चेहरे का नक़ाब उतार देना तुमने तो देखा है उनका असली चेहरा उनको तुम बेनकाब करना इनसे तुम मत डरना और इन झूठों की ज़रा भी इज़्ज़त मत करना इन्हें तो इज़्ज़त का मतलब भी नही पता है मगर ये चाहते हैं के तुम इनसे छोटे हो तो इनकी इज़्ज़त करो भले ही ये तम्हारी शराफत का गलत फायदा उठाये
ऐसे रिश्तेदार तुम्हारे सबसे बड़े दुश्मन हैं इनसे जितना हो सके तुम दूर रहना नहीं तो कुछ ऐसा करना के ये ही तुमसे दूर रहने लगें ऐसे रिश्तेदारों के साथ हो कर अगर तुम अकेले हो जाते हो तो बेहतर है के तुम अकेले ही रहना
मगर कुछ रिश्तेदार ऐसे भी है जो तुम्हारी खुशी में खुश होते हैं उनको खुद से कभी दूर मत करना ।
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