मधुशाला

ये दुनिया एक मधुशाला है जहाँ सब किसी ना किसी तरह की शराब के नशे में है और नशे को हक़ीक़त समझ रहे हैं,

यह शराब इतनि मीठी है की हमे इसकी आदत लग जाती है और हम इसके नशे में ही रहना चाहते है
हम हक़ीक़त से दूर भागते है क्यों के हक़ीक़त कड़वी है,

हर इंसान अपनी हक़ीक़त को दिमाग के छुपे हुए दरवाज़े में बंद कर देता है
मगर हक़ीक़त  ज़्यादा देर छुपी नहीं रह सकती

जब इस शराब का नशा फटेगा तब हमे ये समझ आएगा के जिसे हम हक़ीक़त समझते रहे वो तो भरम था

मैं तो मधुशाला में घूमते रहता हूँ पर शराब नहीं पिता
जब मधुशाला का दरवाज़ा खुलेगा चला जाऊंगा।

और आप अगर नशे में रहोगे दरवाज़ा खुलेगा तो भी नही देख सकोगे ।

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