मैं नही हूँ

हिन्दू मानते हैं भगवान मंदिर में रहता है ।
मुस्लिम को लगता है खुदा मस्जिद में रहता है।
मगर सच तो ये है के वो तो मंदिर और मस्जिद के बाहर कटोरा ले कर बैठता है
वो तो भीख मांगता है और वो ही भीख भी देता है ।
मज़दूर बन कर घर बनाता है और घर का मालिक बन कर मज़दूरी भी देता है।
अध्यापक बन कर शिक्षा देता है और विद्यार्थी बन कर शिक्षषा अध्यन करता है ।
पैगम्बर बन कर आता है और खुद ही उस पैगाम पर चलता है।
है तो वो एक ही मगर कभी खुद को ब्रह्मा तो कभी खुद को अल्लाह बताता है ।
खुद को अनुभव करने के लिए उसने खुद को कई प्रकार में बांट दिया है ।
हरण बन कर घांस खाता है, शेर बन कर हिरण का शिकार करता है
कहीं पुजारी बन कर पूजा करता है तो कहीं नमाज़ी बन कर नमाज़ पढ़ता है।
सच तो ये है के कोई खुदा नही है सिर्फ और सिर्फ खुदा है।
कोई भगवान नही है केवल भगवान है ।
बस वो ही है हर जगह वो ही है
मैं नहीं हूँ मैं कहीं नहीं हूँ

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